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गोठड़ा : पर्यावरण प्रदूषण NOC को लेकर जनसुनवाई, किसानों ने किया जमकर विरोध



गोठड़ा ( 17 जनवरी 2025 )। डालमिया सीमेंट लिमिटेड द्वारा पर्यावरण प्रदूषण NOC को लेकर जनसुनवाई का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता एडीएम (उप जिला कलेक्टर) ने की। इस जनसुनवाई में किसानों और ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और कई मुद्दों पर सवाल उठाए। जनसुनवाई में एसडीएम जय सिंह, पुलिस उप अधीक्षक राजवीर सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।



किसानों ने मांग की कि उन्हें जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए, स्थानीय युवाओं को सीमेंट फैक्ट्री में रोजगार देने की मांग की गई, किसानों ने यह सवाल उठाया कि सीमेंट फैक्ट्री के कारण होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण से कैसे निपटा जाएगा, यह सवाल भी उठाया गया कि सीमेंट कंपनी द्वारा कितने पेड़ काटे जाएंगे और इसके बदले सीमेंट कंपनी द्वारा कितने नए पेड़ लगाए जाएंगे, किसानों ने चारागाह भूमि और पशुओं के लिए समुचित व्यवस्था की, किसानों ने यह सवाल पूछा कि मंदिर माफी की जमीन के उपयोग को लेकर क्या निर्णय लिया जाएगा, किसानों ने यह जानने की कोशिश की कि पूर्व में श्री सीमेंट को पर्यावरण NOC किस आधार पर दी गई थी, जबकि वहाँ किसानों द्वारा विरोध किया गया था लेकिन उसके बावजूद कंपनी को NOC दे दी गई है,  



जनसुनवाई में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधि और किसान नेता भी उपस्थित थे। इनमें प्रमुख रूप से नवलगढ़ के प्रधान दिनेश सुंडा, पंचायत समिति सदस्य प्रताप पूनिया, गोठड़ा सरपंच अर्जुन वाल्मीकि, परसरामपुरा सरपंच कणीराम, किसान नेता कैलाश यादव, बलबीर यादव, तेजपाल स्वामी सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे।



किसानों ने अपने मुद्दों को सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं कंपनी प्रतिनिधि मंडल ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं व सुझावों पर गौर किया जाएगा ।


यह जनसुनवाई किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गई, जहां उन्होंने अपनी समस्याओं और सवालों को सामने रखा। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और किसानों के साथ मिलकर समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ाने का आश्वासन दिया।



जनसुनवाई में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया, प्रधान दिनेश सुंडा ने प्रशासनिक अधिकारियों से तीव्र बहस की और अंततः मंच पर जाकर उनके सामने बैठ गए। इस घटना ने जनसुनवाई का माहौल गर्मा दिया और किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तनाव पैदा हो गया।


प्रधान दिनेश सुंडा ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई में स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की आवाज़ को नजरअंदाज किया जा रहा था। उनका कहना था कि प्रशासन और कंपनी के अधिकारी सिर्फ अपने फायदे के लिए जनसुनवाई का आयोजन कर रहे हैं, जबकि किसानों की समस्याओं और चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।


जनसुनवाई के दौरान जब किसानों  ने अपनी समस्याएं और सवाल उठाए, तो दिनेश सुंडा ने देखा कि उनके सवालों का सही तरीके से जवाब नहीं दिया जा रहा था। इससे नाराज होकर उन्होंने मंच की ओर कदम बढ़ाए और अधिकारियों के सामने जाकर बैठ गए, ताकि जनसुनवाई के मंच पर उनके सवाल उठाए जा सकें।


किसान नेताओं ने किसानों के पक्ष में जमकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि सीमेंट कंपनी का पर्यावरण NOC दि जाता है, तो इसका प्रतिकूल असर स्थानीय पर्यावरण, खेती-बाड़ी और किसानों के जीवन पर पड़ेगा। उनका कहना था कि पहले इस पर किसानों और ग्रामीणों से पूरी तरह से चर्चा की जानी चाहिए और फिर ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।