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सीकर संभाग और नीम का थाना जिले के लिए करेंगे आंदोलन : सुंडा

सीकर ( 2 जनवरी 2025 ) हाल ही में भजनलाल सरकार द्वारा सीकर संभाग और नीम का थाना जिले को समाप्त करने की घोषणा के बाद, इसे लेकर विभिन्न संगठनों और नेताओं का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को सीकर में इंडिया गठबंधन के सभी दलों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय के खिलाफ एक बैठक आयोजित की। बैठक में झुंझुनूं जिले से कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सुंडा, उदयपुरवाटी विधायक भगवानाराम सैनी और मंडावा विधायक रीटा चौधरी भी शामिल हुए।



बैठक में कांग्रेस के नेताओं ने गहलोत सरकार के उस फैसले को समर्थन दिया, जिसके तहत नीम का थाना को जिला और सीकर को संभाग बनाया गया था। दिनेश सुंडा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि गहलोत सरकार ने यह निर्णय जनता की मांग और विकास के दृष्टिकोण से लिया था। उन्होंने कहा कि नई सरकार से जनता को यह उम्मीद थी कि वह इस व्यवस्था को सही तरीके से चलाएगी, लेकिन वर्तमान पर्ची सरकार ने बिना कोई ठोस विचार किए और केवल राजनीतिक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन जिलों और संभागों को समाप्त कर दिया है, जहां भाजपा को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपेक्षाकृत कम सफलता मिली थी।


सुंडा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निर्णय केवल राजनीतिक दुर्भावना पर आधारित है, जिससे आम जनता को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले का खामियाजा प्रदेश की पर्ची सरकार को भुगतना पड़ेगा, और इस मामले में कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी।


सुंडा ने यह भी कहा कि झुंझुनूं जिला कांग्रेस कमेटी इस आंदोलन में पूरी तरह से भाग लेगी, और हर एक कार्यकर्ता इसमें शामिल रहेगा।



सीकर में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अन्य प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित थे। इनमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, सीकर सांसद अमराराम, चूरू सांसद राहुल कस्वां, नीम का थाना विधायक सुरेश मोदी, सादुलपुर की पूर्व विधायक कृष्णा पूनियां, पूर्व मंत्री महादेवसिंह खंडेला, रतनगढ़ विधायक पुसाराम गोदारा, सुजानगढ़ विधायक मनोज मेघवाल, सीकर सभापति जीवन खां, और सीकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनिता गठाला शामिल थे। इन सभी ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की और इस फैसले को जनता के खिलाफ बताया।


बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि सभी संगठन मिलकर प्रदेश भर में आंदोलन करेंगे और इस निर्णय के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाएंगे। आंदोलन के स्वरूप और तारीखों का ऐलान जल्द किया जाएगा। इस दौरान सभी नेताओं ने सरकार से मांग की कि वह इस निर्णय को वापस ले और जनता की भावनाओं का सम्मान करे।