जयपुर ( 6 जनवरी 2025 ) राजधानी जयपुर में रविवार को हार्ट अटैक से दो युवाओं की मौत हो गई, दोनों मामलों में युवाओं की अचानक मौत के कारण लोग हैरान हैं। पहला मामला मानसरोवर इलाके का है, जहां 35 वर्षीय प्रदीप गुर्जर की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि दूसरा मामला शिप्रापथ थाना इलाके का है, जहां 23 वर्षीय यतींद्र जाटोलिया ने नींद में साइलेंट हार्ट अटैक के कारण अपनी जान गंवाई।
प्रदीप गुर्जर का दिल का दौरा पार्क में वॉक के दौरान
रविवार सुबह करीब 7:30 बजे प्रदीप गुर्जर अपने घर से बाहर पार्क में वॉक करने गए थे। पार्क में वॉक करने के बाद वह एक बैंच पर बैठने के लिए गए, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह गिर पड़े। आसपास के लोगों ने तुरंत उन्हें देखा और स्थानीय पुलिस को सूचित किया। शिप्रापथ थाना पुलिस के मुताबिक, पीसीआर वाहन को मौके पर भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने प्रदीप को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि हार्ट अटैक के कारण उनकी मौत हुई थी।
जब प्रदीप की पत्नी को इस बारे में जानकारी दी गई, तो उन्होंने बताया कि प्रदीप की तबीयत पहले से ठीक नहीं थी, हालांकि किसी ने भी गंभीरता से इसे नहीं लिया। घटना के बाद शिप्रापथ थाना के सीआई अमित कुमार ने बताया कि इस मामले में कोई संदेह नहीं है, और प्रदीप की मौत हार्ट अटैक से हुई थी।
यतींद्र जाटोलिया की सोते-सोते हार्ट अटैक से मौत
दूसरी घटना शनिवार रात की है, जब 23 वर्षीय यतींद्र जाटोलिया की नींद में साइलेंट हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। यतींद्र जयपुर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे थे और एसएफएस कॉलोनी के एक कमरे में अपने दोस्तों के साथ रहते थे। उनके बड़े भाई निरंजन ने बताया कि यतींद्र शनिवार रात 12 बजे तक पढ़ाई कर रहे थे और फिर सोने चले गए। सुबह 6 बजे, जब उनके साथ रहने वाले दोस्त ने उन्हें उठाया, तो वह बेहोश पड़े थे और उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी।
साथी ने तुरंत यतींद्र को अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, यतींद्र की मौत साइलेंट हार्ट अटैक से हुई थी, जो आमतौर पर नींद के दौरान आता है और पहचान में नहीं आता। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, क्योंकि वह किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं कर रहे थे।
क्या है साइलेंट हार्ट अटैक?
साइलेंट हार्ट अटैक वह स्थिति होती है, जब दिल में कोई ब्लॉकेज होता है, लेकिन व्यक्ति को इसके बारे में कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। यह अक्सर नींद के दौरान होता है और व्यक्ति को बिना किसी चेतावनी के अचानक दिल का दौरा पड़ता है। साइलेंट हार्ट अटैक के दौरान पीड़ित व्यक्ति को हल्का दर्द या असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन यह इतनी हल्की होती है कि वह इसे नजरअंदाज कर सकते हैं। इस प्रकार के अटैक के बारे में किसी को भी समय रहते सूचित करना और जांच करवाना बहुत महत्वपूर्ण है।
हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाएं
इन दोनों घटनाओं के बाद, हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय है। शहर में बढ़ते हुए तनाव, गलत खानपान, और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आजकल के युवा भी शारीरिक और मानसिक तनाव के कारण दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि नियमित व्यायाम, सही आहार और तनाव से बचाव इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, युवाओं को दिल की सेहत के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।
समाज को जागरूक करने की आवश्यकता
इन दोनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि हार्ट अटैक किसी भी समय हो सकता है, खासकर उन लोगों को जो शारीरिक गतिविधियों से दूर रहते हैं। ऐसे में, समाज को नियमित स्वास्थ्य जांच, फिटनेस रूटीन अपनाने और तनाव कम करने के उपायों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है।
इन दोनों युवाओं की मौत ने हम सभी को यह याद दिलाया है कि हम अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और समय रहते उचित कदम उठाएं।
