नवलगढ़ @रविंद्र पारीक । गोठड़ा परसरामपुरा पश्चिम चूना पत्थर खदान ब्लॉक (ऑक्शन ब्लॉक) के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की जनसुनवाई भारी विरोध के बीच संपन्न हुई। यह खदान 287.7539 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रस्तावित है, जिसमें 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष चूना पत्थर उत्पादन और 1.57 मिलियन टन प्रतिवर्ष ओवरबर्डन (जिसमें ऊपरी मिट्टी भी शामिल है) का उत्खनन किया जाएगा। इस परियोजना में क्रशर की स्थापना भी की जाएगी। यह परियोजना राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली की अधिसूचना के तहत शुरू की गई थी।
जनसुनवाई की शुरुआत में ही भारी विरोध देखा गया। किसानों और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों ने सीमेंट कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। किसानों का कहना था कि कंपनी द्वारा प्रदान किए गए पर्यावरण आंकड़े पुराने हैं और इनसे वर्तमान पर्यावरणीय बदलाव और भूजल स्तर को ध्यान में नहीं रखा गया है।
किसान नेता कैलाश यादव और राजेश कटेवा ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा दी गई समय सीमा के बावजूद जनसुनवाई में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। एडवोकेट तेजपाल स्वामी ने सीमेंट कंपनियों से होने वाली बीमारियों को लेकर सवाल उठाए और इस पर जमकर बहस हुई।
गोठड़ा सरपंच अर्जुन वाल्मीकि ने सीमेंट कंपनियों का स्वागत किया और कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी सीमेंट कंपनियों के सामूहिक प्रयास से नहर का पानी जिले में जल्द से जल्द लाया जाए। वहीं, नवलगढ़ प्रधान दिनेश सुंडा ने जनसुनवाई को महज औपचारिकता करार देते हुए आरोप लगाया कि किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है।
किसानों ने कंपनी द्वारा पेश किए गए पर्यावरण आंकड़ों को पुराना बताया और कहा कि इन आंकड़ों में वर्तमान समय के पर्यावरणीय बदलावों और भूजल स्तर को नहीं जोड़ा गया है। इस पर कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका।
किसान नेता विजेंद्र काजल ने जनसुनवाई में सीमेंट कंपनियों के लिए प्रस्तावित रेल लाइन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और एडीएम को रेल लाइन को लेकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना था कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है, बल्कि इससे स्थानीय समुदाय को भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
जनसुनवाई की अध्यक्षता एडीएम अजय आर्य ने की। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के क्षेत्रीय अधिकारी सुधीर यादव, पुलिस उप अधीक्षक राजवीर सिंह, नवलगढ़ तहसीलदार महेंद्र सिंह सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, दोपहर 2:55 बजे तक जनसुनवाई शुरू नहीं हो पाई, लेकिन एडीएम के आग्रह के बाद यह कार्यवाही शुरू की गई।
जनसुनवाई के दौरान किसानों का विरोध जारी रहा, और उन्होंने यह मांग की कि परियोजना से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और स्वास्थ्य पर प्रभावों का सही तरीके से अध्ययन किया जाए। इसके बावजूद कंपनी की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया, जिससे किसान समुदाय में नाराजगी व्याप्त रही।
यह जनसुनवाई इस बात का संकेत है कि पर्यावरणीय संरक्षण और स्थानीय समुदाय के हितों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। अब यह देखना होगा कि क्या इस परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मिलती है और क्या किसानों की चिंताओं को सही तरीके से संबोधित किया जाता है।
जनसुनवाई में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, नवलगढ़ प्रधान दिनेश सुंडा, गोठड़ा सरपंच अर्जुन वाल्मीकि, किसान नेता राजेश कटेवा, किसान नेता कैलाश यादव, पवन स्वामी, गोकुल सिंह शेखावत, एडवोकेट तेजपाल स्वामी, सुभाष बुटालिया, विजेंद्र काजला, छात्र नेता आशीष प्रचार, महिपाल, हर्षित सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे ।


